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Photo: On my delhi tour, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

tech

ड्रॉइड‑इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एआईपी प्रणाली का सेट‑टू‑वर्क फेज‑2 उद्घाटन

डीआरडीओ और एनएमआरएल ने गुजरात के हजीरा में डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एआईपी प्रणाली के फेज-2 का उद्घाटन किया।

Updated 1 min read

Key points

  • यह स्वदेशी एआईपी प्रणाली हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग कर पनडुब्बियों की पानी के अंदर रहने की क्षमता बढ़ाती है।
  • प्रणाली का विकास डीआरडीओ और नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एनएमआरएल) द्वारा किया गया है।
  • 2027 की शुरुआत में इस मॉड्यूल को कलवरी क्लास पनडुब्बियों में एकीकृत करने के लिए माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को दिया जाएगा।

Why it matters. यह तकनीक भारतीय नौसेना की विदेशी निर्भरता को कम कर हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बियों की रणनीतिक बढ़त और सुरक्षा बढ़ा सकती है।

डीआरडीओ और एनएमआरएल ने 24 अक्टूबर 2026 को गुजरात के हजीरा में लार्सन एंड टुब्रो कॉम्प्लेक्स में स्वदेशी एआईपी प्रणाली के 'सेटिंग टू वर्क फेज-2' का उद्घाटन किया। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस समारोह में वर्चुअली शिरकत की, जबकि वाइस एडमिरल बी शिवकुमार और डॉ आर बालमुरलीकृष्णन मौके पर मौजूद थे। यह हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक आधारित प्रणाली कलवरी क्लास पनडुब्बियों पर लगाई जाएगी। इसे 2027 की शुरुआत में इंटीग्रेशन के लिए माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंपा जाएगा।

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ड्रॉइड‑इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एआईपी प्रणाली का सेट‑टू‑वर्क फेज‑2 उद्घाटन

DRDO की स्वदेशी एआईपी प्रणाली का सेटिंग टू वर्क फेज-2 हजीरा में उद्घाटन. यह पनडुब्बी की पानी के अंदर क्षमता बढ़ाएगी. 2027 में कलवारी क्लास पर इंटीग्रेशन की योजना है. भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी एआईपी प्रणाली के एनर्जी मॉड्यूल का ‘सेटिंग टू वर्क फेज-2’ गतिविधि का उद्घाटन हो गया. यह प्रणाली नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला यानी एनएमआरएल और डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई है. और पढ़ेंएआईपी प्रणाली पनडुब्बी को वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करके पानी के अंदर लंबे समय तक रहने की क्षमता बढ़ाती है. 24 अक्टूबर 2026 को ग.

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