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Photo: Illustrative image — Photo: Akaniji, CC BY-SA 3.0, via Wikimedia Commons

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बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों पर ताले, भारत के कपड़ा उद्योग को अवसर

बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों पर ताले लगने से भारत के कपड़ा कारोबारियों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद

Updated 1 min read

Key points

  • बांग्लादेश की इन फैक्ट्रियों में 40 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं
  • जुलाई 2023 से जून 2026 के बीच 282 BGMEA और 120 BKMEA सदस्य फैक्ट्रियां बंद हुईं
  • नोएडा से 2025-26 में संयुक्त निर्यात 21,095 करोड़ रुपये रहा, जबकि बेंगलुरु अर्बन से 16,205 करोड़ रुपये

Why it matters. बांग्लादेश में उत्पादन रुकने से अमेरिका और यूरोप के ब्रांड दूसरे देशों से ऑर्डर बढ़ा सकते हैं, जिससे भारतीय कपड़ा उद्योग को फायदा हो सकता है.

2 नवंबर को मजदूरों के प्रदर्शन के चलते बांग्लादेश की करीब 679 से 690 फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने की खबर आई. इन फैक्ट्रियों में 40 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, और मजदूर सैलरी 12500 टका से बढ़ाकर 30000 टका करने की मांग कर रहे हैं. सरकार ने वेतन बोर्ड बनाने का फैसला किया है, लेकिन विरोध अभी पूरी तरह थमा नहीं है. भारत के तिरुपुर जिले से 2025-26 में टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट और हस्तशिल्प का संयुक्त निर्यात 38,677 करोड़ रुपये रहा, जिससे यहां के कारोबारियों को विदेशी खरीदारों का विकल्प मिल सकता है.

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बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों पर ताले, भारत के कपड़ा उद्योग को अवसर

बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर लगे ताले भारत के कपड़ा कारोबारियों के लिए कमाई का रास्ता खोल सकते हैं. तिरुपुर, नोएडा, सूरत, लुधियाना और बेंगलुरु जैसे शहर इस मौके को भुना सकते हैं. लेकिन फायदा तभी होगा, जब भारत विदेशी खरीदारों को सस्ता कपड़ा, अच्छी क्वालिटी और समय पर डिलीवरी दे पाएगा. बांग्लादेश में कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों पर ताले लग रहे हैं. मजदूर सड़कों पर हैं. फैक्ट्रियों में काम रुक रहा है. इसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहने वाला. अमेरिका और यूरोप के जिन बड़े ब्रांडों को समय पर कपड़े चाहिए, वे अब दूसरे देशों की तरफ देख सकते हैं. भारत भी इनमें से एक है. 2 नवंबर को मजदूरों के प्र.

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