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चिप महँगी होने से बजट स्मार्टफ़ोन की कीमत बढ़ी, चीनी ब्रांडों का बाजार हिस्सा घटा

चिप महंगी होने से बजट स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ीं और चीनी ब्रांडों का बाजार हिस्सा घटा।

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Key points

  • मेमोरी चिप महंगी होने से चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों की हिस्सेदारी 2016 के बाद के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है।
  • भारतीय ब्रांड लावा और एआई प्लस की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 7% हो गई है।
  • एप्पल का भारत में रेवेन्यू एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।

Why it matters. चिप की बढ़ती कीमतों के कारण बजट स्मार्टफोन कम हो रहे हैं, जिससे भारतीय ब्रांडों को अवसर मिला है और प्रीमियम फोन की मांग बढ़ी है।

मेमोरी चिप की कीमतों में वृद्धि के कारण वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसे चीनी ब्रांडों की बाजार हिस्सेदारी 2016 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई है। कंपनियों ने सस्ते फोन का उत्पादन कम किया है जिससे 7 से 10 हजार रुपये के बजट फोन की कमी हो गई है। इस स्थिति में लावा और एआई प्लस जैसे भारतीय ब्रांडों की हिस्सेदारी बढ़कर 7% हो गई है। एप्पल का रेवेन्यू एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

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चिप महँगी होने से बजट स्मार्टफ़ोन की कीमत बढ़ी, चीनी ब्रांडों का बाजार हिस्सा घटा

चिप महंगी होने से चीनी स्मार्टफोन की बिक्री घटी, जिससे बजट फोन मिलना मुश्किल हुआ है. वहीं, लावा जैसे भारतीय ब्रांड्स को फायदा मिला है. स्मार्टफोन बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. मेमोरी चिप महंगी होने के कारण वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसे चीनी ब्रांड्स की हिस्सेदारी घटकर 2016 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई है. कंपनियों ने सस्ते फोन बनाने कम कर दिए हैं, जिससे आम आदमी को 7 से 10 हजार रुपये के बजट फोन ढूंढने में परेशानी हो रही है. इस खाली जगह का फायदा उठाते हुए लावा और एआई प्लस जैसे भारतीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 7% हो गई है. दूसरी तरफ, भारत में प्रीमियम आईफोन का क्रेज लगातार बढ़.

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