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Photo: Pinakpani, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

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केंद्र सरकार कैंसर की दवाओं की कीमतों में 70% तक कटौती कर सकती है

केंद्र सरकार कैंसर की दवाओं की कीमतों में 70% तक कटौती के लिए व्यापारिक मार्जिन को 30% तक सीमित करने का प्रस्ताव लाई है।

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Key points

  • सरकार व्यापारिक मार्जिन को एमआरपी के 30% तक सीमित कर दवाओं की कीमतें 20-70% तक घटा सकती है।
  • 9 अक्टूबर को गठित विशेषज्ञ समिति दवाओं की अंतिम सूची तैयार करेगी, जिस पर NPPA विचार करेगा।
  • 2019 में 42 गैर-अनुसूचित दवाओं पर इसी तरह के नियम से मरीजों को सालाना 984 करोड़ रुपये की बचत हुई थी।

Why it matters. इस प्रस्ताव से कैंसर मरीजों के इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सकता है, हालांकि उद्योग संगठनों ने छोटे वितरकों और दवाओं की उपलब्धता पर असर की चिंता जताई है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कैंसर की दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को एमआरपी के 30 फीसदी तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम से दवाओं की कीमतों में 20 से 70 फीसदी की कमी और मरीजों को सालाना 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई है जो दवाओं की सूची तय करेगी। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में यह योजना पेश की गई है।

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केंद्र सरकार कैंसर की दवाओं की कीमतों में 70% तक कटौती कर सकती है

कैंसर का इलाज पहले से ही मरीजों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालता है। महंगी दवाओं के कारण कई परिवारों को अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं की कीमतों को कम करने की दिशा में एक प्रस्ताव पेश किया है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से कुछ कैंसर की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी में 20 से 70 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इससे मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। कैंसर की दवाओं की कीमतें कैसे कम होंगी? केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया है कि वह कैंसर की दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को उनकी अधिकतम ख.

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