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तमिलनाडु के वन अधिकार दावों की जांच के लिए पूर्व CJI गवई होंगे समिति प्रमुख

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI गवई को वन अधिकार दावों की जांच समिति का प्रमुख नियुक्त किया

Updated 2 min read

Key points

  • समिति की अध्यक्षता पूर्व CJI भूषण आर गवई करेंगे, सदस्यों में CEC का एक अधिकारी और तमिलनाडु के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शामिल हैं
  • राज्य को 30 दिनों में शेष ग्राम सभाएं गठित करने और 5 महीने में दावों का निपटारा पूरा करने का निर्देश दिया गया
  • समिति को हर महीने राज्य से प्रगति रिपोर्ट मिलेगी और वह अपने निष्कर्ष सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी

Why it matters. अगासथियमलै क्षेत्र में वन अधिकार दावों के निपटारे की प्रक्रिया अब समिति की निगरानी और समय-सीमा के दबाव में आगे बढ़ेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भूषण आर गवई की अध्यक्षता में विशेष समिति बनाई, जो वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत तमिलनाडु के अधिकारियों के आदेशों की जांच करेगी। राज्य सरकार को 30 दिनों के भीतर शेष ग्राम सभाएं गठित करने और 5 महीने के भीतर तीन स्तरीय व्यवस्था से दावों का निपटारा पूरा करने का निर्देश मिला है। पीठ ने राज्य को प्रक्रिया शुरू न करने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 2016 में मद्रास उच्च न्यायालय का अंतरिम स्थगन हटने के बाद भी वर्षों तक कार्रवाई नहीं हुई।

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तमिलनाडु के वन अधिकार दावों की जांच के लिए पूर्व CJI गवई होंगे समिति प्रमुख

The Supreme Court on Friday appointed former Chief Justice of India (CJI) Bhushan R Gavai to head a special committee that will scrutinise orders passed by authorities in Tamil Nadu under the Forest Rights Act, 2006 (FRA), even as it came down hard on the state government for its prolonged failure to initiate the statutory process to identify and adjudicate the claims of forest dwellers in the eco The Supreme Court on Friday appointed former Chief Justice of India (CJI) Bhushan R Gavai to head a special committee that will scrutinise orders passed by authorities in Tamil Nadu under the Forest.

CJI पर पोस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केरल कांग्रेस पदाधिकारियों को अवमानना नोटिस भेजा

केरल कांग्रेस ने CJI सूर्यकांत के खिलाफ विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है. लेकिन अदालत ने फिलहाल इसे स्वीकार नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह जांचेगी कि माफी का हलफनामा कलम से आया है या दिल से. विवादित पोस्ट म कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने बिना शर्त माफी मांग ली है. विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और उसके लिए जिम्मेदार पदाधिकारी को पद से हटाने की जानकारी भी दे दी है. लेकिन इतना करने के बाद भी पार्टी क.

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