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EAC-PM रिपोर्ट: 2036 तक 5-9 वर्ष के प्राइमरी स्कूली बच्चों में लगभग 20% गिरावट का अनुमान
EAC-PM रिपोर्ट: 2036 तक 5-9 वर्ष के प्राइमरी स्कूली बच्चों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत घटने का अनुमान
Key points
- 2011 में 5 से 9 वर्ष के बच्चों की संख्या 12.53 करोड़ थी, जो 2036 तक घटकर 10.02 करोड़ होने का अनुमान है।
- 2012-13 से 2021-22 के बीच ग्रामीण स्कूलों में नामांकन 78 लाख घटा, जबकि शहरी स्कूलों में लगभग 93 लाख छात्र जुड़े।
- UDISE+ आंकड़ों के अनुसार 2025-26 तक प्राथमिक स्कूलों की संख्या 12.6 प्रतिशत घटकर 7.22 लाख रह गई।
Why it matters. रिपोर्ट ने सलाह दी है कि केवल राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर दूर-दराज या ग्रामीण इलाकों के स्कूल बंद नहीं किए जाने चाहिए, बल्कि स्थानीय मांग और पड़ोसी स्कूलों की क्षमता देखी जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने एक नए वर्किंग पेपर में बताया कि 5 से 9 वर्ष के बच्चों की संख्या 2011 में 12.53 करोड़ थी, जो 2036 तक घटकर 10.02 करोड़ रह जाने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार 2011 की तुलना में यह लगभग 20 प्रतिशत की कमी है, जबकि देश की फर्टिलिटी रेट 2019 के 2.1 से घटकर 2024 में 1.9 पर आ गई है। सौम्य कांति घोष और शशिधरण शर्मा द्वारा तैयार इस रिसर्च के मुताबिक शहरी स्कूलों में 2012-13 से 2021-22 के बीच लगभग 93 लाख नए छात्र जुड़े।
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EAC-PM रिपोर्ट: 2036 तक 5-9 वर्ष के प्राइमरी स्कूली बच्चों में लगभग 20% गिरावट का अनुमान
भारत में घटेंगे स्कूली बच्चे, 2036 तक प्राइमरी ग्रुप में 20% की कमी का अनुमान EAC PM Report: आने वाले समय में भारत में प्राइमरी एजुकेशन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की ओर से जारी एक नए वर्किंग पेपर के अनुसार देश में 5 से 9 वर्ष की आयु वर्ग के प्राइमरी स्कूली बच्चों की आबादी में 2011 से 2036 के बीच लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है. हाउ इंडिया इज ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन कैपेसिटी अंडर द न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 की इस रिसर्च को एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार व EAC-PM के सदस्य सौम्य कांति घोष और अर्थशास्त्री शशिधरण शर्मा ने तैयार किय.