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8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स ने 15 साल की कटौती अवधि घटाने की मांग की
पेंशनर्स ने 8वें वेतन आयोग से कम्यूटेड पेंशन बहाली की 15 साल की अवधि घटाने की मांग की
Key points
- कम्यूटेशन के बदले मिली रकम की भरपाई करीब 10 से 12 साल में होने का पेंशनर संगठनों का तर्क है।
- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 27 नवंबर 2024 को 808 याचिकाओं पर फैसला सुनाया, पर 15 साल का नियम नहीं बदला।
- 8वें वेतन आयोग ने अभी इस अवधि को घटाने का कोई अंतिम फैसला या गारंटी नहीं दी है।
Why it matters. पेंशनर्स को 15 साल तक घटी हुई मासिक पेंशन मिलती रह सकती है, इसलिए 8वें वेतन आयोग का रुख उनकी हर महीने की आय को प्रभावित कर सकता है।
पेंशनर संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने कम्यूटेशन के बाद पेंशन बहाली की 15 साल की अवधि घटाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि कम्यूट की गई रकम करीब 10 से 12 साल में वसूल हो जाती है, इसलिए उसके बाद कटौती जारी रहना पेंशनर पर अतिरिक्त बोझ है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 27 नवंबर 2024 को 808 याचिकाओं पर और दिल्ली हाई कोर्ट ने 29 मई 2026 को 15 साल का नियम बरकरार रखा।
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8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स ने 15 साल की कटौती अवधि घटाने की मांग की
8वें वेतन आयोग से केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स को सिर्फ पेंशन बढ़ने की उम्मीद नहीं है, बल्कि वे 15 साल पुराने एक नियम में बदलाव भी चाहते हैं. फिलहाल रिटायरमेंट के समय पेंशन का कुछ हिस्सा एकमुश्त लेने पर उसकी मासिक कटौती 15 साल तक जारी रहती है. पेंशनर्स संगठनों का तर्क है कि कम्यूट की गई रकम की भरपाई करीब 10 से 12 साल में हो जाती है. इसलिए वे यह अवधि घटाकर 11 या 12 साल करने की मांग कर रहे हैं. नौकरी के आखिरी दिन या रिटायरमेंट के आसपास अगर किसी सरकारी कर्मचारी को अचानक पैसों की जरूरत हो तो उसके पास एक विकल्प होता है- अपनी पेंशन का कुछ हिस्सा पहले ही एकमुश्त ले लेना. इसे पेंशन कम्यूटेशन कहते हैं. घर.
8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स चाहते हैं कि एकमुश्त राशि की कटौती 15 के बजाय 11-12 साल हो
8वें वेतन आयोग से केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स को सिर्फ पेंशन बढ़ने की उम्मीद नहीं है, बल्कि वे 15 साल पुराने एक नियम में बदलाव भी चाहते हैं. फिलहाल रिटायरमेंट के समय पेंशन का कुछ हिस्सा एकमुश्त लेने पर उसकी मासिक कटौती 15 साल तक जारी रहती है. पेंशनर्स संगठनों का तर्क है कि कम्यूट की गई रकम की भरपाई करीब 10 से 12 साल में हो जाती है. इसलिए वे यह अवधि घटाकर 11 या 12 साल करने की मांग कर रहे हैं. नौकरी के आखिरी दिन या रिटायरमेंट के आसपास अगर किसी सरकारी कर्मचारी को अचानक पैसों की जरूरत हो तो उसके पास एक विकल्प होता है- अपनी पेंशन का कुछ हिस्सा पहले ही एकमुश्त ले लेना. इसे पेंशन कम्यूटेशन कहते हैं. घर.