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भारत-ब्रिटेन FTA के बाद स्कॉच व्हिस्की के थोक आयात में 1000 प्रतिशत की बढ़ोतरी
स्कॉच व्हिस्की के थोक आयात में 1000 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि छोटी बोतलों की मांग गिरी।
Key points
- अगस्त में 2 लीटर से बड़े कंटेनरों में थोक स्कॉच का आयात 12.39 मिलियन डॉलर, यानी करीब 104 करोड़ रुपये तक पहुंचा
- जिन के आयात में 150 प्रतिशत का उछाल आया और मात्रा में 185 प्रतिशत (2,16,438 लीटर) की बढ़ोतरी हुई
- स्कॉच पर लगने वाला 75 प्रतिशत टैक्स अगले 10 सालों में धीरे-धीरे घटाकर 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा
Why it matters. ट्रेड डील के तहत स्कॉच पर टैक्स आगे चलकर 40 प्रतिशत तक घटेगा, इसलिए विदेशी शराब का आयात आने वाले सालों में और बढ़ सकता है।
15 जुलाई 2026 को भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील के बाद स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया, जिसके बाद यूरोपीय स्कॉच की मांग 1000 प्रतिशत बढ़ गई और कंपनियां कंटेनरों में थोक स्कॉच भेजने लगीं। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में थोक स्कॉच का आयात 679 प्रतिशत बढ़कर 2.5 मिलियन लीटर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह 320454 लीटर था। 2 लीटर या उससे छोटी बोतलों का आयात लगभग 30 प्रतिशत गिरकर 3.08 मिलियन डॉलर रह गया, जबकि जिन के आयात में 150 प्रतिशत का उछाल आया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शराब कंपनियों को भरोसा दिलाया कि HSN वर्गीकरण के विवाद को वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर जल्द सुलझा लिया जाएगा।
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भारत-ब्रिटेन FTA के बाद स्कॉच व्हिस्की के थोक आयात में 1000 प्रतिशत की बढ़ोतरी
भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के बाद थोक स्कॉच व्हिस्की के इंपोर्ट में 1000 प्रतिशत का रिकॉर्ड उछाल आया है. विदेशी कंपनियां अब तैयार बोतलों की जगह बड़े कंटेनरों में स्कॉच मंगाकर सीधे भारत में बॉटलिंग कर रही हैं. यानी अब उसी की डिमांड है. विदेशी शराब मिल जाए और वो भी सस्ती तो कौन छोड़ना चाहेगा. सबूत आपके सामने है. जिस विदेशी स्कॉच व्हिस्की को पीने के लिए भारतीय भारी-भरकम कीमत चुकाते थे, उस पर टैक्स कम हुआ तो भारतीय टूट पड़े. जी हां, ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में यूरोपीय स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स कम हुआ तो उसकी डिमांड 100-200 फीसदी नहीं, बल्.