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Ghazipur News : धान MSP पर बेचने से पहले बनवा लें फार्मर ID, एक्सपर्ट से जानिए रजिस्ट्रेशन का तरीका
गाजीपुर में धान MSP पर बेचने के लिए फार्मर ID बनवाना अनिवार्य है, जिसके लिए आधार और खतौनी की आवश्यकता होगी।
Key points
- फार्मर ID बनाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और खतौनी के साथ ई-केवाईसी और भूमि मैपिंग जरूरी है।
- रेवतीपुर ब्लॉक में 2,800 किसानों में से 1,900 का पंजीकरण पूरा हो चुका है।
- खतौनी में नाम का मिलान न होना और पुश्तैनी जमीन में हिस्सेदारी का स्पष्ट न होना पंजीकरण में मुख्य बाधाएं हैं।
Why it matters. फार्मर ID से सरकारी योजनाओं और खरीद में पारदर्शिता बढ़ेगी, हालांकि MSP भुगतान के लिए अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करना भी आवश्यक होगा।
गाजीपुर के रेवतीपुर ब्लॉक में तकनीकी सहायक प्रबंधक धीरज कुमार राय ने धान की सरकारी खरीद के लिए फार्मर ID पंजीकरण पर जोर दिया है। इस प्रक्रिया के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और खतौनी की आवश्यकता होती है, जिसके बाद लेखपाल द्वारा भूमि सत्यापन किया जाता है। रेवतीपुर के 2,800 में से 1,900 किसानों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन नाम मिलान और पुश्तैनी जमीन में हिस्सेदारी के विवाद बाधा बन रहे हैं।
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Ghazipur News : धान MSP पर बेचने से पहले बनवा लें फार्मर ID, एक्सपर्ट से जानिए रजिस्ट्रेशन का तरीका
Farmer ID Benefits : फार्मर ID किसानों की पहचान और भूमि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की पहल है. इसे बनवाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और खतौनी जैसे दस्तावेज जरूरी हैं, लेकिन पुश्तैनी जमीन और कई हिस्सेदार होने से रजिस्ट्रेशन अटक सकता है. जानिए आवेदन की प्रक्रिया, संभावित फायदे और समस्या का समाधान. लोकल 18 ने इस बारे में गाजीपुर के रेवतीपुर ब्लॉक में तकनीकी सहायक प्रबंधक धीरज राय गाजीपुर. खरीफ के बाद अब किसान भाई रबी सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं. इन दिनों धान की कटाई के बीच किसानों की फार्मर ID बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों की पहचान और उनके भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि सरकारी कृषि योजनाओं और खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके. गाजीपुर के रेवतीपुर ब्लॉक में तकनीकी सहायक प्रबंधक के रूप में कार्यरत धीरज कुमार राय लोकल 18 से बताते हैं कि किसानों की फार्मर ID बनाने की प्रक्रिया में आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और खतौनी की जरूरत होती है. पंजीकरण के दौरान ई-केवाईसी के बाद भूमि रिकॉर्ड की मैपिंग की जाती है. इसके बाद संबंधित लेखपाल भूमि संबंधी विवरण की जांच और सत्यापन करते हैं. प्रक्रिया पूरी होने पर किसान की फार्मर ID जनरेट होती है. क्यों बढ़ रही परेशानी धीरज राय के अनुसार, रेवतीपुर ब्लॉक में करीब 2,800 में से 1900 किसानों का रजिस्ट्रेशन होने की जानकारी दी गई है. हालांकि, कुछ किसानों की फार्मर ID बनाने में नाम का मिलान न होना और जमीन में हिस्सेदारी का निर्धारण नहीं होना बड़ी बाधा बन रहा है. Mustard Farming : सरसों की खेत.

