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सोने के बदले कर्ज का कारोबार तेज, डिफ़ॉल्ट जोखिम बढ़ा
भारत में सोने के बदले कर्ज का कारोबार तेज हुआ है, जिससे डिफ़ॉल्ट जोखिम बढ़ने की आशंका है।
Key points
- 31 अगस्त 2026 तक बैंकों का गोल्ड लोन 5.6 लाख करोड़ और NBFC का कर्ज 3.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
- RBI ने 1 अप्रैल 2026 से नए नियम लागू किए, जिसमें 2.5 लाख रुपये तक के कर्ज पर अधिकतम 85% लोन की सीमा तय की गई है।
- ICRA की रिपोर्ट के अनुसार गोल्ड लोन बाजार मार्च 2028 तक 30% से अधिक बढ़कर 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
Why it matters. पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया गोल्ड लोन लेना और सोने की कीमतों में गिरावट आने से वित्तीय कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
भारतीय बैंकों और NBFC ने सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण गोल्ड लोन कारोबार बढ़ाया है। RBI के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक बैंकों का यह कर्ज 88.1% बढ़कर 5.52 लाख करोड़ रुपये हो गया। मैक्वेरी, बजाज फाइनेंस और पिरामल फाइनेंस ने चिंता जताई है कि कुछ ग्राहक पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया गोल्ड लोन ले रहे हैं। पिरामल फाइनेंस के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में 15% से 23% लोन ऐसे ग्राहकों को दिए गए जिन्होंने अन्य कर्ज की किस्तें 90 दिनों से अधिक समय से नहीं चुकाई थीं।
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सोने के बदले कर्ज का कारोबार तेज, डिफ़ॉल्ट जोखिम बढ़ा
गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें एक बड़ी समस्या है. लोग एक कर्ज को चुकाने के लिए दूसरा कर्ज ले रहे हैं. यह चलन ग्राहकों के साथ-साथ कंपनियों और बैंक लिए चिंता की बात हो सकती है. भारत में सोने के बदले कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. सोने की कीमतों में बढ़ोतरी और आसानी से कर्ज मिलने के कारण बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) इस कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. लेकिन अब इस तेजी के पीछे छिपे एक दूसरे पहलू पर सवाल उठ रहे हैं. क्या लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए गोल्ड लोन ले रहे हैं या पहले से लिए गए कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए अपना सोना गिरवी रख रहे हैं?कर्.


