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आईटीबीपी ने चीन सीमा पर ड्रोन प्लाटून और भूमिगत बंकरों की तैयारी तेज की
आईटीबीपी ने सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून और भूमिगत बंकरों की तैयारी तेज की।
Key points
- आईटीबीपी ने सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून स्थापित किए।
- सरकार ने 400 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जिसमें 70% ड्रोन क्षमता पर खर्च होगा।
- स्ट्राइक’ प्रशिक्षण कोर्स 2027 तक पूरी फोर्स को कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में तैयार करेगा।
Why it matters. इन निवेशों और प्रशिक्षण से भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी, जिससे संभावित तनाव के समय तेज़ प्रतिक्रिया और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून स्थापित किए और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बड़े पैमाने पर भूमिगत बंकर बनाने की तैयारी तेज की, जैसा कि महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अलंकरण समारोह में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार से 400 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, जिसमें 70% राशि ड्रोन क्षमता बढ़ाने के लिए earmarked है, और 4,000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना में 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी‑ड्रोन पर खर्च होंगे। बल ने 'स्ट्राइक' नामक नया प्रशिक्षण कोर्स तैयार किया है, जिसका लक्ष्य 2027 तक पूरी फोर्स को गलवां जैसी कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षित करना है, और 'शौर्य कमांडो' टीम को प्रत्येक बटालियन में तैनात करने की योजना है।
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आईटीबीपी ने चीन सीमा पर ड्रोन प्लाटून और भूमिगत बंकरों की तैयारी तेज की
भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बल ने सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बड़े स्तर पर भूमिगत बंकर बनाने की तैयारी की जा रही है। गलवां घाटी जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए जवानों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से 'स्ट्राइक' नाम का नया प्रशिक्षण कोर्स भी तैयार किया गया है। आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर स्थित बल के एक केंद्र में आयोजित अलंकरण समारोह के दौरान जवानों को संबोधित करते हुए ये जानकारी दी।