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विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए एलटीसीजी टैक्स घटाने की सेबी की सिफारिश पर चर्चा तेज
सेबी की सिफारिश के बाद विदेशी निवेशकों के लिए एलटीसीजी टैक्स घटाने पर चर्चा और तेज हुई है
Key points
- पिछले दो वर्षों में एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 64 अरब डॉलर निकाले हैं
- जेएम फाइनेंशियल के अनुमान के अनुसार टैक्स पूरी तरह हटने पर भी वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 से 5 अरब डॉलर का नया निवेश आ सकता है
- अक्टूबर 2024 के बाद एफआईआई ने फाइनेंशियल शेयरों से करीब 16 अरब डॉलर निकाले हैं
Why it matters. यदि टैक्स में राहत मिलती है और वैश्विक परिस्थितियां सुधरती हैं, तो बड़े शेयरों और एफआईआई की अधिक हिस्सेदारी वाले सेक्टरों को पहले फायदा मिल सकता है, हालांकि कच्चे तेल की कीमतें भी निवेश की दिशा तय करती हैं।
पिछले दो वर्षों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 64 अरब डॉलर (लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये) निकाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए एलटीसीजी टैक्स हटाने की सिफारिश की है, और सरकार फरवरी के बजट से पहले निवेशकों और टैक्स विशेषज्ञों से राय ले रही है। जेएम फाइनेंशियल के विश्लेषकों के अनुसार सबसे अनुकूल स्थिति में भी वित्त वर्ष 2027-28 तक केवल 3 से 5 अरब डॉलर का नया निवेश आ सकता है, जिससे औसत विदेशी निवेशक के सालाना डॉलर रिटर्न में सिर्फ 2.2 फीसदी बढ़ोतरी होगी।
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विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए एलटीसीजी टैक्स घटाने की सेबी की सिफारिश पर चर्चा तेज
पिछले दो वर्षों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 64 अरब डॉलर (लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम निकासी की है। इस बड़े पलायन के बाद से दलाल स्ट्रीट पर यह मांग लगातार जोर पकड़ रही है कि सरकार विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स यानी एलटीसीजी टैक्स को खत्म या कम करे। हाल ही में बाजार नियामक सेबी की सिफारिशों के बाद इस पर चर्चा और तेज हो गई है। अभी क्या हैं टैक्स के नियम? भारत में सूचीबद्ध शेयरों पर फिलहाल 20 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के अलावा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एस.