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नदियों के प्रदूषण नियंत्रण और कृषि में टिकाऊ सुधार के लिए माइक्रोबायोम तकनीक पर नया ड्राफ्ट तैयार
उत्तर प्रदेश सरकार ने नदियों के प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ कृषि के लिए माइक्रोबायोम तकनीक पर एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है।
Key points
- ड्राफ्ट के तहत माइक्रोबायोम तकनीक का उपयोग जल प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की पहचान के लिए होगा।
- योजना के पहले तीन महीनों में प्रयोगशालाओं की क्षमता का आकलन और पायलट स्थलों का चयन किया जाएगा।
- स्वास्थ्य, कृषि और नगर विकास जैसे विभिन्न विभागों के सहयोग से इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
Why it matters. यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि में सुधार के लिए 'उत्तर प्रदेश स्टेट स्पेसिफिक नोट ऑन माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजीज' ड्राफ्ट तैयार किया है। यूपीपीपीसी की सीईओ कृतिका शर्मा के अनुसार, इस योजना को जल्द मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें लखनऊ स्थित बायो-टेक्नोलॉजी पार्क और यूपीपीपीसी की मुख्य भूमिका होगी। पहले 24 महीनों के चरणबद्ध कार्यान्वयन में प्रयोगशाला क्षमता आकलन, संक्रमण निगरानी और फसल चक्र मूल्यांकन शामिल हैं।
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नदियों के प्रदूषण नियंत्रण और कृषि में टिकाऊ सुधार के लिए माइक्रोबायोम तकनीक पर नया ड्राफ्ट तैयार
-नई तकनीक नदियों के प्रदूषण नियंत्रण और फसलों की गुणवत्ता सुधार में होगी प्रदेश में साइंस और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी पर जोर दिया गया है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति सूक्ष्मजीवों की प्रतिरोधक क्षमता की पहचान, जल प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। यह भी पढ़ें- Prayagraj News: मिट्टी स.