
business
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता बताया, बैंकिंग सुधारों पर भी जोर
वित्त मंत्री सीतारमण ने पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता बताया और बैंकिंग सुधारों पर जोर दिया
Key points
- वित्त मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र के आगे आने तक सरकार पूंजीगत व्यय से विकास को गति देती रहेगी।
- सरकार ने वित्तीय समावेशन के अगले चरण में ऋण तक पहुंच, बीमा और पेंशन को प्राथमिकता तय की है।
- भारतीय बैंकिंग प्रणाली की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो सिफारिशें सौंपेगी।
Why it matters. सरकार का पूंजीगत व्यय पर निर्भर रहना और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना आर्थिक विकास की दिशा का संकेत देता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एचएसबीसी इंडिया के सम्मेलन में कहा कि निजी क्षेत्र आगे नहीं आता तब तक सरकार पूंजीगत व्यय से विकास को गति देती रहेगी। उन्होंने बताया कि पिछले चार से पांच वर्षों में पूंजीगत व्यय के 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' से अच्छे परिणाम मिले हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में गरीबी लगभग 25 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत रह गई है, जिसका श्रेय उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं को दिया। सरकार का लक्ष्य 2047 तक सभी के लिए बीमा कवरेज हासिल करना है, और बैंकिंग प्रणाली की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।
Latest updates
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता बताया, बैंकिंग सुधारों पर भी जोर
देश की आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रखने और वित्तीय संतुलन साधने के बीच केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी प्राथमिकता घोषित किया है। सोमवार को एचएसबीसी इंडिया के तीसरे वार्षिक वित्तीय समावेशन सम्मेलन में एचएसबीसी इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि आर्थिक विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं का समर्थन करते हुए भी सार्वजनिक व्यय को जिम्मेदार और नियंत्रित रखा जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक निजी क्षेत्र अपनी क्षमता विस्तार या नई इकाइयां स्थापित करने के लिए आगे नहीं आता, तब तक सरकार पूंजीगत व्यय के जरिए विकास को गति देती रहेगी।