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केंद्र ने 14,500 करोड़ रुपये की 92 GWh ऊर्जा भंडारण योजना को मंजूरी दी
केंद्र ने 14,500 करोड़ रुपये की 92 गीगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण योजना को मंजूरी दी
Key points
- योजना के तहत कुल 92 गीगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता तीन तकनीकों से विकसित की जाएगी।
- यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए है।
- सरकार ने लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ रुपये की अलग योजना को भी मंजूरी दी।
Why it matters. इस फैसले से देश के 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में 92 गीगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये के वित्तपोषण को मंजूरी दी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसमें बैटरी भंडारण में 30, पंप स्टोरेज में 60 और उभरती भंडारण तकनीकों में दो गीगावाट घंटा क्षमता बनेगी। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी और देश के 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के लिहाज से अहम मानी गई है।
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केंद्र ने 14,500 करोड़ रुपये की 92 GWh ऊर्जा भंडारण योजना को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14,500 करोड़ रुपए की 92 GWh ऊर्जा भंडारण योजना को मंजूरी दी है. यह कदम 2030 तक 500 GW renewable energy हासिल करने के देश के लक्ष्य के अनुरूप है. केंद्र सरकार ने एनर्जी सेक्टर को बड़ा बूस्ट देने के लिए 14,500 करोड़ रुपए के प्लान को मंजूरी दी है. इस लान के तहत ग्रीन एनर्जी स्टोरेज को लेकर काम किया जाएगा. जानकारी के अनुसार इस फंडिंग से 92 गीगावाट घंटे की भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी. वहीं दूसरी ओर सरकार ने लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के 2,814 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से किस तरह क.