world
ओबीसी क्रीमीलेयर: केवल वेतन से तय नहीं होगा दर्जा, केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमीलेयर पर केंद्र के आवेदन पर फैसला सुनाया, 11 मार्च का आदेश केवल इस मामले के पक्षों पर लागू होगा।
Key points
- 11 मार्च के फैसले का दायरा: केवल इस मामले के पक्षों पर लागू होगा।
- पहले से तय वरिष्ठता और पदोन्नति के मामले दोबारा नहीं खोले जाएंगे।
- कोर्ट ने फैसले के पालन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।
Why it matters. केंद्र को चिंता थी कि पुराने मामलों में फैसला लागू होने से नियुक्तियों और दाखिलों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है, अब लंबित मामलों पर संबंधित अदालतें फैसला करेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के विविध आवेदन पर फैसला सुनाते हुए कहा कि 11 मार्च का फैसला केवल इस मामले के पक्षों पर लागू होगा। न्यायमूर्ति पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने तय किया कि पहले से तय वरिष्ठता और पदोन्नति के मामले दोबारा नहीं खोले जाएंगे। लंबित मामलों पर संबंधित अदालतें अपने तथ्यों और पात्रता के आधार पर फैसला करेंगी। कोर्ट ने फैसले के पालन के लिए आठ सप्ताह का और समय दिया है।
Latest updates
ओबीसी क्रीमीलेयर: केवल वेतन से तय नहीं होगा दर्जा, केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से दाखिल एक आवेदन पर फैसला सुनाया। केंद्र ने 11 मार्च को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा था। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के किसी अभ्यर्थी का क्रीमीलेयर दर्जा केवल उसके माता-पिता की वेतन से होने वाली आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पदों की श्रेणी पर भी विचार करना जरूरी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका फैसला इस मामले में शामिल पक्षों पर ही लागू होगा। पहले से तय वरिष्ठता और पदोन्नति के मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा। लंबित मामलों पर संबंधित अदालतें अपने-अपने तथ्यों और प.