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FSSAI ने Old Monk को रम मानने से इनकार किया, कंपनी लेबल बदलने को तैयार
ओल्ड मंक बनाने वाली कंपनी बॉम्बे हाई कोर्ट से याचिका वापस लेकर FSSAI को नए लेबल सौंपने को तैयार
Key points
- FSSAI के मुताबिक Old Monk में बाहर से रम का फ्लेवर मिलाया गया है, जो बोतल के लेबल पर साफ नहीं लिखा था।
- महाराष्ट्र में Old Monk की बिक्री इस साल मई-जून से बंद है।
- कंपनी के वकील वेंकटेश धोंड ने 12 अक्टूबर को बताया कि राज्य के आबकारी विभाग को करीब 350 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
Why it matters. इस फैसले से दूसरी शराब कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि FSSAI ने स्पिरिट में बाहर से फ्लेवर मिलाकर बिना सही लेबल के बेचने वाली सभी कंपनियों पर शिकंजा कसा है।
ओल्ड मंक बनाने वाली मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है, और अब वह FSSAI को नए लेबल सौंपेगी। रेगुलेटर का कहना है कि इस ड्रिंक में बाहर से रम का फ्लेवर मिलाया गया है, जबकि बोतल पर यह साफ नहीं लिखा था। कंपनी ने 3 सितंबर को जमा बदले लेबल पर एडेड फ्लेवर लिखा और 7 साल पुरानी ब्लेंडेड का टैग हटाया, पर रेगुलेटर को प्रोडक्ट को रम कहे जाने पर आपत्ति रही। खोपोली में बनने वाली इस ड्रिंक की बिक्री महाराष्ट्र में इस साल मई-जून से बंद है, और 5 नवंबर को चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी की बेंच के सामने यह कदम उठाया गया।
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FSSAI ने Old Monk को रम मानने से इनकार किया, कंपनी लेबल बदलने को तैयार
महाराष्ट्र में मई महीने से ओल्ड मंक की बिक्री बंद है. फूड रेगुलेटर FSSAI ने इसे रम मानने से इनकार कर दिया है. अब कंपनी बॉम्बे हाई कोर्ट से याचिका वापस लेकर नए लेबल जमा करने को तैयार हो गई है. Old Monk Controversy: भारत के सबसे मशहूर शराब ब्रांड्स में से एक ओल्ड मंक की बिक्री महाराष्ट्र में इस साल मई-जून से ही बंद है. सर्दियों में खूब पसंद की जाने वाली इस ड्रिंक के अचानक गायब होने के पीछे एक सीधा सा सवाल है कि क्या ये वाकई रम है? देश के फूड रेगुलेटर यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का कहना है कि ये रम नहीं है. इस विवाद के बाद खोपोली में इसे बनाने वाली कंपनी ने गुरुवार को बॉम.