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राजस्थान उच्च न्यायालय ने बैंक फर्जी ऋण मामले में कार्रवाई रद्द कर दी
राजस्थान उच्च न्यायालय ने भिवाड़ी शाखा के पूर्व प्रबंधक विवेक शर्मा के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी है।
Key points
- राजस्थान उच्च न्यायालय ने भिवाड़ी शाखा के पूर्व प्रबंधक विवेक शर्मा के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी है।
- दो वरिष्ठ अधिकारियों दिनेश प्रताप तोमर और अवधेश प्रताप सिंह के खिलाफ रिश्वत और षड्यंत्र के मामले में केस दर्ज किए गए हैं।
- विवेक शर्मा ने 2019 में 51 लाख रुपये के फर्जी आवास ऋण मामले को उजागर किया था।
Why it matters. यह मामला बैंक के भ्रष्टाचार नियंत्रण प्रणाली पर प्रकाश डालता है और भविष्य में आने वाले बैंक नियमों को प्रभावित कर सकता है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने भिवाड़ी शाखा के पूर्व प्रबंधक विवेक शर्मा के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी है। अदालत ने बैंक को स्वतंत्र जांच करने का निर्देश दिया और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दो वरिष्ठ अधिकारियों दिनेश प्रताप तोमर और अवधेश प्रताप सिंह के खिलाफ रिश्वत और षड्यंत्र के मामले में केस दर्ज किए हैं। विवेक शर्मा ने 2019 में 51 लाख रुपये के फर्जी ऋण मामले को उजागर किया था।
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राजस्थान उच्च न्यायालय ने बैंक फर्जी ऋण मामले में कार्रवाई रद्द कर दी
राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की भिवाड़ी शाखा में हुए 51 लाख रुपये के फर्जी आवास ऋण मामले को उजागर करने वाले शाखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश को रद्द कर दिया है। उच्च न्यायालय ने चार वर्ष पुराने इस मामले में बैंक को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रिश्वत मांगने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बैंक घोटाला उजागर करने का मामला जयपुर जिले की भिवाड़ी शाखा में जून 2018 में मुख्य प्रबंधक का पदभार संभालने वाले विवेक शर्मा ने अप्रैल 2019 में वर.