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रिलायंस की रिफाइनरी में छप्परफाड़ कमाई, तीसरी तिमाही में भी बरस सकता है पैसा
रिलायंस की रिफाइनरी में शानदार कमाई, सोमवार को शेयर 8.1% तक उछला
Key points
- सितंबर तिमाही में O2C कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 44.2% बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये रहा।
- Nomura के मुताबिक कंसोलिडेटेड EBITDA पिछली तिमाही से 19% बढ़ा और उसके अनुमान से 9% ज्यादा रहा।
- गोल्डमैन सैक्स ने शेयर पर खरीदारी की रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,840 रुपये का टारगेट दिया है।
Why it matters. ब्रोकरेज कंपनियों का मानना है कि वैश्विक हालात का फायदा तीसरी तिमाही में भी जारी रह सकता है, हालांकि जहाज से तेल मंगाने का खर्च दबाव डाल सकता है।
सोमवार, 2 नवंबर 2026 को शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर कारोबार के दौरान करीब 8.1% उछलकर 1,259 रुपये तक पहुंच गया, जो तीन साल से ज्यादा समय में इसकी सबसे बड़ी इंट्राडे तेजी है। कंपनी का मार्केट कैप 17 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया। सितंबर तिमाही में तेल-से-केमिकल (O2C) कारोबार का रेवेन्यू 44.2% बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये और EBITDA 67.9% बढ़कर रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये रहा। गोल्डमैन सैक्स ने 1,840 रुपये और Nomura ने 1,560 रुपये का टारगेट दिया है।
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रिलायंस की रिफाइनरी में छप्परफाड़ कमाई, तीसरी तिमाही में भी बरस सकता है पैसा
Reliance Industries Share: रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए सितंबर तिमाही काफी शानदार रही है. कंपनी के तेल से लेकर केमिकल कारोबार तक में कमाई बढ़ी है. तीसरी तिमाही में महंगे जहाज भाड़े से कुछ दबाव जरूर आ सकता है, लेकिन रियायती कीमत पर कच्चा तेल मिलने से उसे राहत की उम्मीद है. एक्सपर्ट का कहना है कि कंपनी अपनी इस मजबूत कमाई को दिसंबर तिमाही में भी कायम रख पाएगी, ऐसा भरोसा है. Reliance Industries Share: रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए इन दिनों चारों ओर से अच्छी खबरें आ रही हैं. एक ओर जियो प्लेटफार्म की शानदार लॉन्चिंग हुई. तो दूसरी ओर कंपनी ने सितंबर तिमाही में रिफाइनरी से लेकर केमिकल कारोबार तक शानदार कमाई की है. यही वजह है कि सोमवार 2 नवंबर 2026 को शेयर बाजार में रिलायंस के शेयर ने जबरदस्त छलांग लगाई. कारोबार के दौरान शेयर करीब 8.1% उछलकर 1,259 रुपये तक पहुंच गया. यह तीन साल से ज्यादा समय में शेयर की सबसे बड़ी इंट्राडे तेजी है. कंपनी का मार्केट कैप भी 17 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया. बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी कंपनी की कमाई मजबूत रह सकती है. हालांकि, जहाज से तेल मंगाने का खर्च बढ़ने से कुछ दबाव आ सकता है, लेकिन सस्ता कच्चा तेल इस नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकता है. कच्चा तेल सीधे गाड़ी या मशीन में इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसे बड़ी-बड़ी रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद पेट्रोल, डीजल और दूसरे उत्पाद तैयार होते हैं. कंपनी को इस काम से कितनी कमाई होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कच्चा तेल कितने में खरीदा और उससे तैयार उत्.