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ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए सरकार लागू करेगी सिम बाइंडिंग नियम
सरकार ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए 1 जनवरी से सिम बाइंडिंग नियम लागू करेगी।
Key points
- दूरसंचार विभाग द्वारा 1 जनवरी से सिम बाइंडिंग नियम लागू किया जाएगा ताकि डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लग सके।
- यह तकनीक जांच करेगी कि संबंधित सिम उसी फोन में मौजूद है या नहीं, जिससे बिना सिम के ऐप चलाने वाले अपराधियों की पहचान आसान होगी।
- विभाग ने पिछले साल 28 नवंबर को वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिगनल जैसे मैसेजिंग ऐप्स के लिए यह निर्देश जारी किया था।
Why it matters. सिम बाइंडिंग से मैसेजिंग अकाउंट के दुरुपयोग और साइबर ठगी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, जिससे डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा बढ़ सकती है।
दूरसंचार विभाग ने ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए 1 जनवरी से सिम बाइंडिंग नियम लागू करने का ऐलान किया है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि यूजर उसी डिवाइस पर सर्विस ले रहा है जिस पर सिम वेरिफिकेशन हुआ था। विभाग ने पिछले साल 28 नवंबर को वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिगनल जैसे ऐप्स के लिए यह निर्देश दिया था। इसका उद्देश्य बिना सिम के मैसेजिंग अकाउंट के दुरुपयोग और साइबर ठगी पर नियंत्रण पाना है।
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ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए सरकार लागू करेगी सिम बाइंडिंग नियम
SIM Binding : दूरसंचार विभाग ने अगले साल से सिम बाइंडिंग सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है. विभाग का मानना है कि इसे भ्रामक सूचनाओं के प्रसार और ऑनलाइन ठगी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. सिम बाइंडिंग एक तरह की सुरक्षा व्यवस्था है, जिसमें सिम और मोबाइल के बीच संबंधों की पुष्टि की जाती है. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सिम निकालकर वॉट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप नहीं चलाया जा सकेगा. नई दिल्ली. दूरसंचार विभाग ने सिम बाइडिंग (SIM Binding) का नियम लागू करने की बात कही है. जब से इसका खुलासा हुआ है, हर यूजर के मन में इसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं. हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर सिम बाइंडिंग होती क्या है.

