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डारियस खंबाटा ने टाटा संस बोर्ड के फैसलों पर जताई नाराजगी
डारियस खंबाटा ने टाटा संस बोर्ड के फैसलों पर नाराजगी जताई और पुनर्नियुक्ति से इनकार किया
Key points
- खंबाटा ने पुनर्नियुक्ति से इनकार किया और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा व सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को पत्र लिखा
- 17 सितंबर की बैठक में एन चंद्रशेखरन को पुनः चेयरमैन नियुक्त करने और शेयर बाजार में लिस्टिंग आगे बढ़ाने का फैसला हुआ
- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोनों पक्षों से विवाद आपसी बातचीत से सुलझाने की अपील की
Why it matters. रिजर्व बैंक द्वारा अपर-लेयर एनबीएफसी के रूप में वर्गीकरण के बाद लिस्टिंग अनिवार्य है, और विशेषज्ञों के अनुसार विवाद लंबा खिंचने से समूह की कंपनियों के वैल्यूएशन और निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।
खंबाटा, जिन्होंने पुनर्नियुक्ति से इनकार किया है, ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को लिखे पत्र में सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि रतन टाटा जीवित होते, तो क्या बोर्ड 17 सितंबर को इस तरह का कदम उठाता। उनके मुताबिक इन घटनाओं ने टाटा संस की प्रतिष्ठा और भारतीय कॉर्पोरेट जगत की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
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डारियस खंबाटा ने टाटा संस बोर्ड के फैसलों पर जताई नाराजगी
देश के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी घरानों में शामिल टाटा समूह के भीतर होल्डिंग कंपनी टाटा संस और इसके मुख्य शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच का अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी रह चुके खंबाटा ने पुनर्नियुक्ति से इनकार करते हुए 17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक से जुड़े घटनाक्रमों की तीखी आलोचना की है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को लिखे पत्र में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पूर्व टाटा समूह चेयरमैन रतन टाटा जीवित होते, तो क्या बोर्ड इसी तरह कार्रवाई करता? इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय वित्त मं.