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शहरों में करीब 1 करोड़ मकान खाली, फिर भी सस्ते किराये के घर क्यों नहीं मिल रहे
शहरों में करीब 1 करोड़ मकान खाली हैं, फिर भी सस्ते किराये के घर नहीं मिल रहे हैं
Key points
- मेट्रो, शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में कुल 5-7 करोड़ मकानों की कमी का अनुमान है।
- भारत के ज्यादातर शहरों में मकान किराये पर देने से सालाना केवल 2-3% रेंटल यील्ड मिलती है।
- सितंबर 2020 में शुरू हुई ARHC योजना के तहत मार्च 2025 तक सात राज्यों में 82,273 नए यूनिट मंजूर किए गए थे।
Why it matters. जमीन और निर्माण की ऊंची लागत के कारण सस्ते मकान बनाना मुश्किल हो रहा है, जिससे कम आय वाले परिवारों के लिए सस्ता किराये का घर पाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के शहरों में करीब 1 करोड़ मकान खाली हैं, फिर भी मेट्रो, शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में कुल 5-7 करोड़ मकानों की कमी का अनुमान है। इसमें मेट्रो शहरों में 2-3 करोड़ और अन्य शहरी इलाकों में 1.5-2 करोड़ मकानों की कमी शामिल है। NAREDCO की रिपोर्ट के मुताबिक, किराये पर रहने वाले परिवारों में करीब 80% आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग से आते हैं। मकान मालिक किराये से कम कमाई और कानूनी विवादों के डर से खाली घर किराये पर देने से बचते हैं।
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शहरों में करीब 1 करोड़ मकान खाली, फिर भी सस्ते किराये के घर क्यों नहीं मिल रहे
भारत के शहरों में करीब 1 करोड़ मकान खाली हैं, फिर भी सस्ता किराया मिलना मुश्किल है. जानिए मकान मालिक घर किराये पर देने से क्यों बचते हैं और सरकारी ARHC योजना का असर सीमित क्यों रहा. भारत के शहरों में करीब एक करोड़ मकान खाली पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को सस्ते किराये के घर नहीं मिल रहे हैं. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो, शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में कुल 5-7 करोड़ मकानों की कमी का अनुमान है. इसमें मेट्रो शहरों में 2-3 करोड़ और अन्य शहरी इलाकों में 1.5-2 करोड़ मकानों की कमी शामिल है. वहीं, 2011 की जनगणना के मुताबिक, शहरी भारत के करीब 27% परिवार किराये के मकानों में रहते थे.NAREDC.