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मक्का पर एथनॉल का दबाव से बढ़ सकती हैं अंडे और दूध की कीमतें
एथनॉल के लिए गन्ने और चावल पर प्रतिबंध के बाद मक्का की बढ़ती मांग से अंडे और दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं।
मुख्य बातें
- गन्ने और चावल पर प्रतिबंध के बाद एथनॉल उद्योग अब मक्का पर निर्भर हो रहा है।
- 2026-27 में मक्का की खपत 1.6 करोड़ टन तक पहुंच सकती है जिसमें 30 लाख टन अतिरिक्त आवश्यकता होगी।
- मक्का की बढ़ती लागत से पोल्ट्री और डेयरी उद्योगों पर असर पड़कर अंडे और दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं।
यह क्यों मायने रखता है। मक्का की बढ़ती मांग और लागत के कारण पोल्ट्री और डेयरी उद्योगों पर दबाव पड़ने से आम जनता के लिए अंडे, चिकन और दूध महंगे हो सकते हैं।
एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चावल पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब उद्योग मक्का पर निर्भर हो रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 2026-27 में मक्का की खपत 1.6 करोड़ टन तक पहुंच सकती है जिसमें 30 लाख टन अतिरिक्त आवश्यकता होगी। मक्का की बढ़ती मांग से पोल्ट्री और डेयरी उद्योगों पर लागत बढ़ने से अंडे, चिकन और दूध की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
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मक्का पर एथनॉल का दबाव से बढ़ सकती हैं अंडे और दूध की कीमतें
इस बढ़ती मांग से अंडे, चिकन और दूध सहित अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। पहले गन्ने से बड़े पैमाने पर एथनॉल बनाने से चीनी संकट और कीमतों पर दबाव आया था। चावल के बढ़ते उपयोग से उसकी उपलब्धता और कीमतों के लिए चिंता पैदा हुई थी।
Sources
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