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सोने के लिए कर्ज लेने में दिक्कत, डिफॉल्ट 5 महीने में डबल
भारत में सोने के लिए कर्ज लेने पर डिफॉल्ट दर पांच महीने में दोगुनी हो गई है और RBI ने नए नियम लागू किए हैं।
मुख्य बातें
- पिछले पांच महीनों में गोल्ड लोन डिफॉल्ट दर करीब दोगुनी होकर 0.3 प्रतिशत हो गई है।
- अगस्त 2026 तक देश में बकाया गोल्ड लोन 22.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े पर पहुंच गया है।
- 1 अप्रैल 2026 से 2.5 लाख रुपये तक के लोन के लिए अधिकतम LTV को 85 प्रतिशत कर दिया गया है।
यह क्यों मायने रखता है। छोटे कर्जदारों के लिए सोने की संपत्ति पर उच्च कर्ज सीमा और सोने की वापसी की समय सीमा के नए नियम वित्तीय संस्थानों के लिए अधिक पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करते हैं।
भारत में सोने के लिए कर्ज लेने का बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है जहाँ पिछले पांच महीनों में डिफॉल्ट दर दोगुनी होकर 0.3 प्रतिशत हो गई है। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2026 तक बकाया कर्ज 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है जबकि लोन की रकम 12 प्रतिशत बढ़कर 8.2 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इस वित्तीय दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 अप्रैल 2026 से नए नियम लागू किए हैं जो छोटे ग्राहकों के लिए एलटीवी सीमा 85 प्रतिशत तक बढ़ाते हैं और सोने की वापसी को सात दिनों के भीतर बाध्य बनाते हैं।
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सोने के लिए कर्ज लेने में दिक्कत, डिफॉल्ट 5 महीने में डबल
भारत में सोने के लिए कर्ज लेने की दरें रिकॉर्ड स्तर पर हैं और लोग सोना बेचकर कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच महीनों में गोल्ड लोन डिफॉल्ट दर लगभग दोगुनी हो गई है। तीन साल के दौरान बकाया कर्ज की राशि 22.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस वित्तीय दबाव के समाधान के लिए एक व्यापक और पारदर्शी ढांचा प्रस्तुत किया है। यह ढांचा छोटे ग्राहकों को उच्च लोन-टू-वैल्यू लिमिट प्रदान करता है और बैंकों को सही मूल्यांकन, सख्त नीलामी और समय पर जेवर वापस करने के लिए बाध्य करता है।
Sources
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