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कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोलकाता नगर निगम चुनाव की अधिसूचना पर रोक लगाई
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कोलकाता नगर निगम चुनाव की अधिसूचना पर रोक लगाई, वार्ड परिसीमन याचिका पर सुनवाई बाकी है।
Key points
- कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को एकल पीठ का फैसला आने तक चुनाव अधिसूचना जारी न करने का निर्देश दिया।
- कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने की तैयारी है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।
- खंडपीठ ने कहा कि निर्वाचित परिषद भंग होने के बाद प्रशासक की सिफारिश को निगम की वैध सिफारिश नहीं माना जा सकता।
Why it matters. नगर निगम चुनाव और वार्डों के परिसीमन की वैधता पर अंतिम फैसला एकल पीठ की सुनवाई के बाद ही आएगा, इसलिए चुनाव की तारीखें अभी अनिश्चित हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को राज्य चुनाव आयोग से कहा कि वार्ड परिसीमन पर एकल पीठ का फैसला आने तक अधिसूचना जारी न की जाए। वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने की योजना को पूर्व माकपा पार्षद दीपू दास ने चुनौती दी है, जिनका आरोप है कि सीमाएं वास्तविक आबादी के बजाय मतदाता सूची के आधार पर तय हुईं। निर्वाचित परिषद 8 जून 2026 को भंग होने के बाद प्रशासक स्मिता पांडे की 5 अगस्त की सिफारिश पर खंडपीठ ने कहा कि मामला पहली नजर में मजबूत है।
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोलकाता नगर निगम चुनाव की अधिसूचना पर रोक लगाई
पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के अगले चुनाव की तैयारी को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश से झटका लगा है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वार्ड परिसीमन से जुड़ी याचिका पर एकल पीठ का फैसला आने तक चुनाव कराने की अधिसूचना जारी न की जाए। यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या मौजूदा 144 से बढ़ाकर 209 करने की तैयारी है। इस परिसीमन को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दाखिल की गई है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रे मुखर्जी की अवकाशकालीन खंडपीठ ने यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता और कोलकाता नगर निगम के पूर्व.
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