Skip to footer
A container ship barthed at Berth No. 3 of Netaji Subhas Dock, Port of Kolkata.jpg
Photo: Illustrative image — Photo: Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata, GODL-India, via Wikimedia Commons

business

भारतीय फार्मा कंपनियां एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं

भारतीय दवा कंपनियां आयात घटाने के लिए एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं और बाजार 17.1 प्रतिशत बढ़ा।

Updated 1 min read

मुख्य बातें

  • भारतीय दवा कंपनियां एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं।
  • सितंबर 2026 में दवा बाजार 17.1 प्रतिशत बढ़ा।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में एपीआई आयात 4.35 अरब डॉलर था।

यह क्यों मायने रखता है। यह बदलाव देश को आयात पर निर्भरता से मुक्त करने और घरेलू स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

अपडेट स्रोत: TV9 Bharatvarsh

भारतीय दवा कंपनियां आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं। आईक्यूवीआईए के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में देश का दवा बाजार 17.1 प्रतिशत बढ़ा जो तीन साल की सबसे तेज वृद्धि है। पंकज बनर्जी के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में 4.35 अरब डॉलर का एपीआई आयात हुआ जिसमें चीन की हिस्सेदारी 73.71 प्रतिशत थी।

Latest updates

भारतीय फार्मा कंपनियां एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं

निर्भरता कम करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए भारतीय दवा कंपनियां एपीआई निर्माण में निवेश कर रही हैं। देश का औषध उद्योग अब सस्ती जेनेरिक दवाओं से हटकर उच्च मूल्य वाली दवाओं और जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कंपनियां सक्रिय औषधि सामग्री के उत्पादन में पैसा लगा रही हैं। इस परिवर्तन का मुख्य कारण घरेलू स्वास्थ्य जरूरतों में हुए बदलाव और पुरानी बीमारियों के उपचार की आवश्यकता है।

Sources