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भारतीय फार्मा कंपनियां एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं
भारतीय दवा कंपनियां आयात घटाने के लिए एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं और बाजार 17.1 प्रतिशत बढ़ा।
मुख्य बातें
- भारतीय दवा कंपनियां एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं।
- सितंबर 2026 में दवा बाजार 17.1 प्रतिशत बढ़ा।
- वित्त वर्ष 2024-25 में एपीआई आयात 4.35 अरब डॉलर था।
यह क्यों मायने रखता है। यह बदलाव देश को आयात पर निर्भरता से मुक्त करने और घरेलू स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
भारतीय दवा कंपनियां आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं। आईक्यूवीआईए के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में देश का दवा बाजार 17.1 प्रतिशत बढ़ा जो तीन साल की सबसे तेज वृद्धि है। पंकज बनर्जी के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में 4.35 अरब डॉलर का एपीआई आयात हुआ जिसमें चीन की हिस्सेदारी 73.71 प्रतिशत थी।
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भारतीय फार्मा कंपनियां एपीआई मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं
निर्भरता कम करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए भारतीय दवा कंपनियां एपीआई निर्माण में निवेश कर रही हैं। देश का औषध उद्योग अब सस्ती जेनेरिक दवाओं से हटकर उच्च मूल्य वाली दवाओं और जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कंपनियां सक्रिय औषधि सामग्री के उत्पादन में पैसा लगा रही हैं। इस परिवर्तन का मुख्य कारण घरेलू स्वास्थ्य जरूरतों में हुए बदलाव और पुरानी बीमारियों के उपचार की आवश्यकता है।
Sources
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