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विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की, लोकतंत्र बचाने के लिए महारैली
विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और लोकतंत्र बचाने के लिए महारैली आयोजित की।
मुख्य बातें
- बीस विपक्षी दलों के नेताओं ने रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की।
- सत्ता पक्ष ने रैली में उतनी भीड़ न आने का आरोप लगाया और इसे अराजकता बताया।
- सर्वोच्च अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर रोक लगा दी।
यह क्यों मायने रखता है। यह घटना राजनीतिक तनाव और लोकतंत्र के प्रति विपक्षी दलों की चिंता को दर्शाती है, जबकि सत्ता पक्ष इसे अराजकता का प्रयास बता रहा है।
विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' नामक महारैली आयोजित कर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की। बीस दलों के नेताओं ने इसमें भाग लिया और दावा किया कि लोकतंत्र बचाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना अनिवार्य है। सत्ता पक्ष ने रैली में उतनी भीड़ नहीं आने का आरोप लगाया और इसे अराजकता का प्रयास बताया। साथ ही, सर्वोच्च अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर रोक लगा दी।
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विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की, लोकतंत्र बचाने के लिए महारैली
विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' नामक महारैली का आयोजन किया। इस रैली में बीस राजनीतिक दलों के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और 'एसआइआर' को रोकने की एक ही मांग रखी। सुधीश पचौरी के अनुसार, यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक बहस के बीच छिपे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए हुआ। सभी नेताओं ने यह माना कि लोकतंत्र को बचाने का रास्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के हटने से होकर गुजरता है।
Sources
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