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सोनिया गांधी के बयान पर रामदास आठवले की सहमति, आपातकाल पर क्या बोले?

सोनिया गांधी ने अपनी नई किताब में मोदी की सोच अलग बताया और आपातकाल के दौरान अधिकारों पर लगाए गए अंकुश की बात की।

Updated 2 min read

मुख्य बातें

  • सोनिया गांधी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की भारत के प्रति सोच उनके अलग है।
  • आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया और बंदी प्रत्यक्षीकरण को निलंबित किया गया था।
  • इंदिरा गांधी ने ही मार्च 1977 में आपातकाल खत्म कराने का फैसला किया था।

यह क्यों मायने रखता है। सोनिया गांधी के बयान से यह स्पष्ट होता है कि वे वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और पिछले ऐतिहासिक घटनाओं, विशेष रूप से आपातकाल, पर अपनी राय रखती हैं।

अपडेट स्रोत: Dainik Bhaskar, BBC

सोनिया गांधी ने 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली अपनी किताब 'बिलॉंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत के प्रति सोच उनके अलग है। उन्होंने पिछले 12 वर्षों में लोकतंत्र और संस्थाओं पर हुए नुकसान की चिंता जताई और बताया कि इंदिरा गांधी ने ही मार्च 1977 में आपातकाल खत्म कराने का फैसला किया था। सोनिया ने स्पष्ट किया कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया था जबकि बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार को निलंबित कर दिया गया था।

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सोनिया गांधी के बयान पर रामदास आठवले की सहमति, आपातकाल पर क्या बोले?

सोनिया गांधी ने अपनी 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' में बताया कि 2004 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार किया था। उन्होंने इस फैसले के पीछे राहुल और प्रियंका गांधी का भी सहयोग बताया और कहा कि मोदी की सोच भारत के लिए अलग है। सोनिया ने पिछले 12 वर्षों में लोकतंत्र को हुए नुकसान पर चिंता व्यक्त की और कहा कि राजीव से मिलने के 60 वर्ष बाद भी वे वही हैं, बस अब कम हंसती हैं।

सोनिया गांधी के बयान पर रामदास आठवले की सहमति, आपातकाल पर क्या बोले?

7 नवंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ़ लव' के लॉन्च से पहले दिए इंटरव्यू में 1975 के आपातकाल, संजय गांधी और बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटनाओं पर अपनी राय रखी। उन्होंने अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' और 'द गार्डियन' को दिए गए बयान में स्पष्ट किया कि इमरजेंसी लागू करने के लिए केवल संजय गांधी ही जिम्मेदार नहीं थे, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था।

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