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झारखंड हाई कोर्ट ने कैंसर से पीड़ित बच्चे को छोड़ने को क्रूरता कहा
झारखंड हाई कोर्ट ने कैंसर से पीड़ित बच्चे को छोड़ने को क्रूरता कहा और तलाक का आदेश पुष्ट किया
मुख्य बातें
- न्यायालय ने तलाक के आदेश को पुष्ट करते हुए माता की अपील खारिज कर दी।
- अदालत ने माता की मासिक रखरखाव राशि को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया।
- न्यायालय ने कहा कि पति के आरोपों का स्पष्ट उत्तर न देना उन्हें स्वीकार करना माना जाता है।
यह क्यों मायने रखता है। यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि कानूनी प्रक्रिया में पक्षों द्वारा दिए गए उत्तरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
झारखंड हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को फैसला सुनाया कि कैंसर से पीड़ित सात महीने की बच्ची को छोड़कर जाना और उसकी देखभाल न करना क्रूरता है। न्यायालय ने पति द्वारा दायर याचिका पर विचार करते हुए परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को पुष्ट किया। अदालत ने माता की अपील खारिज करते हुए यह भी कहा कि पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों का स्पष्ट उत्तर न देना माना जाता है कि वे स्वीकार किए गए हैं।
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झारखंड हाई कोर्ट ने कैंसर से पीड़ित बच्चे को छोड़ने को क्रूरता कहा
5 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीक्षक एमएस सोनाक और न्यायाधीश मनोज प्रसाद की संयुक्त पीठ ने फैसला सुनाया कि सात महीने की बच्ची को छोड़कर और उसके कैंसर के रोग को जानते हुए भी देखभाल न करने का कार्य क्रूरता है। जमशेदपुर के परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए विवाह विच्छेद आदेश को हाई कोर्ट ने पुष्ट किया। यह मामला पति द्वारा दायर याचिका पर सुना गया था।
Sources
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