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ठाणे में दही हांडी उत्सव में पुलिस पर हमले के 21 आरोपी बरी
ठाणे में 2008 के दही हांडी मामले में पुलिस पर हमले के 21 आरोपी को अदालत ने बरी कर दिया है।
मुख्य बातें
- महाराष्ट्र के ठाणे की अदालत ने 2008 के दंगा मामले में 21 लोगों को बरी कर दिया है।
- घटना में जय जवान गोविंदा ग्रुप और माझगांव गोविंदा ग्रुप के बीच झड़प हुई थी।
- अभियोजन पक्ष ने गवाहों की कमी और पुलिस बयानों की अनुपस्थिति के कारण सबूत नहीं दिए।
यह क्यों मायने रखता है। यह फैसला दर्शाता है कि जब गवाहों की कमी और सीधे सबूतों की अनुपस्थिति होती है, तो अदालत अपराध के तथ्यों को स्थापित नहीं कर सकती।
महाराष्ट्र के ठाणे की अदालत ने 2008 में दही हांडी उत्सव के दौरान हुए दंगा और मारपीट मामले में 21 लोगों को बरी कर दिया है। इस घटना में जय जवान गोविंदा ग्रुप और माझगांव गोविंदा ग्रुप के बीच विवाद होकर पुलिस पर हमला हुआ था जिसमें कई अधिकारी घायल हुए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज ए. पाटकी ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने साबित नहीं किया कि आरोपियों ने पुलिस को रोका था या गैरकानूनी जमावड़ा बनाया था। गवाहों की कमी और घायल पुलिसकर्मियों के बयानों की अनुपस्थिति के कारण सबूतों की कमी देखी गई।
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ठाणे में दही हांडी उत्सव में पुलिस पर हमले के 21 आरोपी बरी
2008 में ठाणे की अदालत ने दही हांडी उत्सव के दौरान हुए दंगा और मारपीट मामले में 21 लोगों को बरी कर दिया है। उसी वर्ष 25 अगस्त को टेंभी नाका और टावर नाका पर जय जवान गोविंदा ग्रुप और माझगांव गोविंदा ग्रुप के बीच विवाद हुआ था। इस झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और उनके वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया था।
Sources
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