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न्यायालय परिसर, कर्णप्रयाग, जिला चमोली.jpg
Photo: Nitin Maletha, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

politics

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं के गर्भपात मामले में अदालतों को नए दिशा-निर्देश दिए

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं के गर्भपात मामलों में अदालतों को मेडिकल रिपोर्ट और त्वरित सुनवाई के नए दिशा-निर्देश दिए।

Updated 1 min read

मुख्य बातें

  • मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं के गर्भपात मामलों में अदालतों को नए दिशा-निर्देश जारी किए।
  • जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने 14 वर्षीय पीड़िता के मामले में 26 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी।
  • अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में शारीरिक स्थिति, गर्भ की अवधि और चिकित्सीय सुरक्षा के तीन बिंदु अनिवार्य हैं।

यह क्यों मायने रखता है। यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि भविष्य में कोई भी याचिका मेडिकल बोर्ड की अधूरी या अस्पष्ट रिपोर्ट की वजह से अदालतों में न अटके।

अपडेट स्रोत: Amar Ujala

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई करते हुए दुष्कर्म पीड़िताओं के गर्भपात मामलों में अदालतों को नए दिशा-निर्देश दिए। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने 14 वर्षीय पीड़िता के मामले में 26 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी और शाम 4 बजे तक प्रक्रिया पूर्ण करने का आदेश दिया। अब सभी जिला न्यायालयों को मेडिकल बोर्ड की स्पष्ट रिपोर्ट में शारीरिक स्थिति, गर्भ की अवधि और सुरक्षा के तीन बिंदु अनिवार्य कर दिए गए हैं।

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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िताओं के गर्भपात मामले में अदालतों को नए दिशा-निर्देश दिए

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म और अन्य विशेष मामलों में गर्भपात संबंधी याचिकाओं के लिए राज्य भर की अदालतों को नए निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि इन संवेदनशील मामलों में हर दिन कीमती होता है, इसलिए अगली अदालत में भेजने से पहले मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य है।

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