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ये शहर है भारत की 'पटाखा कैपिटल': यहीं बनते हैं देश के 90% क्रैकर्स; 1920 के दशक में इन्होंने रखी थी नींव
ये शहर है भारत की 'पटाखा कैपिटल': यहीं बनते हैं देश के 90% क्रैकर्स; 1920 के दशक में इन्होंने रखी थी नींव
मुख्य बातें
- तमिलनाडु के शिवकाशी में देश के लगभग 90 प्रतिशत पटाखे उत्पादित होते हैं।
- इस शहर में कुल 8,000 छोटे और बड़े कारखाने स्थित हैं।
- 1920 के दशक में पी. अय्या नाडार और शन्मुगा नाडार ने यहाँ उद्योग की नींव रखी थी।
यह क्यों मायने रखता है। शिवकाशी में स्थित 8,000 कारखाने देश के पटाखा उद्योग की रीढ़ हैं और यहाँ से उत्पादित पटाखे पूरे भारत में दीवाली के दौरान बड़े पैमाने पर बेचे जाते हैं।
तमिलनाडु के शिवकाशी को भारत की पटाखों की राजधानी माना जाता है जहाँ देश के लगभग 90 प्रतिशत पटाखे बनते हैं। इस शहर में कुल 8,000 कारखाने स्थित हैं जिनसे दिवाली के दौरान लगभग 4,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। 1920 के दशक में पी. अय्या नाडार और शन्मुगा नाडार ने यहाँ उद्योग की नींव रखी थी।
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ये शहर है भारत की 'पटाखा कैपिटल': यहीं बनते हैं देश के 90% क्रैकर्स; 1920 के दशक में इन्होंने रखी थी नींव
दीवाली 2026 के दौरान तमिलनाडु के शिवकाशी में देश भर में फोड़े जाने वाले पटाखों का उत्पादन लगभग 8,000 कारखानों द्वारा किया जाता है। इस शहर को भारत की पटाखा राजधानी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ देश के कुल पटाखों का 85% से 90% हिस्सा बनाया जाता है। इस उद्योग से शिवकाशी में लगभग 8 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। 1920 के दशक में इस क्षेत्र में पटाखों के कारखानों की नींव रखी गई थी।
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