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सोनिया गांधी ने संस्मरण में बाबरी मस्जिद विध्वंस पर आंसू बहाए, लंबी लड़ाई की बात की
सोनिया गांधी ने अपनी स्मरणिका में बाबरी मस्जिद के 1992 के विध्वंस पर आंसू बहाए और लंबी लड़ाई की बात की।
मुख्य बातें
- सोनिया गांधी ने अपनी किताब में 1992 में अयोध्या के मस्जिद विध्वंस को देखा था और रोया था।
- उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को बचाने के लिए अब लंबी लड़ाई लड़नी होगी।
- वेने बीजेपी और कट्टर हिंदुत्व राजनीति के उभार में अपनी पार्टी की नाकामियों का भी हाथ रहा।
यह क्यों मायने रखता है। यह कथन कांग्रेस नेताओं के इतिहास और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आगामी स्मरणिका 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' में 1992 में अयोध्या के बाबरी मस्जिद के विध्वंस को देखा था, जिससे उन्हें आंसू आ गए थे। उन्होंने बताया कि उस घटना ने उन्हें समझाया कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू द्वारा बनाए गए धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को बचाने के लिए अब लंबी लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनकी पार्टी की नाकामियों में बीजेपी और कट्टर हिंदुत्व राजनीति का योगदान रहा था।
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सोनिया गांधी ने संस्मरण में बाबरी मस्जिद विध्वंस पर आंसू बहाए, लंबी लड़ाई की बात की
सोनिया गांधी ने अपनी स्मृति-लेख पुस्तक में 1992 में अयोध्या में हुए मस्जिद विध्वंस का जिक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने टीवी पर यह दृश्य देखा तो उन्हें आंसू आ गए। उन्होंने इस घटना के बाद महसूस किया कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके साथियों द्वारा बनाए गए धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को बचाने के लिए अब लंबी लड़ाई लड़नी होगी। इस संस्मरण में उन्होंने उत्तर भारत में हुए परिवर्तनों और उस समय अयोध्या में बनी एक मस्जिद के विध्वंस पर भी प्रकाश डाला है।
Sources
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